भारतीय सुगम संगीत में रिकॉर्डिंग की भूमिका |
भारतीय सुगम संगीत संस्कृति एवं परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है जिसमें रिकॉर्डिंग तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संगीत को संरक्षित करने, विस्तारित करने और श्रोताओं तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम बन गया है।भारतीय सुगम संगीत में रिकॉर्डिंग तकनीक ने समय के साथ बड़े बदलाव किए हैं। प्रारंभ में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग सीमित साधनों के साथ की जाती थी जिससे कलाकारों को बिना संपादन के लाइव प्रदर्शन करना पड़ता था। बाद में टेप रिकॉर्डिंग,एनालॉग रिकॉर्डिंग तथा संपादन की सुविधा प्रदान की जिससे गुणवत्ता में सुधार हुआ। रिकॉर्डिंग तकनीक का विकास ग्रामोफोन युग से लेकर डिजिटल स्ट्रीमिंग तक हुआ है। संगीत उद्योग ने नई ऊंचाइयों को छुआ है ।यह संगीत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने ,संरक्षण करने, व्यावसायिक लाभ प्रदान करने में मदद करता है।
भारतीय सुगम संगीत अपने विकास की एक लंबी यात्रा में अनेक परिवर्तन देख चुका है ।इसकी प्रस्तुति और संरचना में समय के साथ कई बदलाव आए हैं। आज के कंप्यूटर के युग के चलते रिकॉर्डिंग पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव आ चुके हैं जिसकी सहायता से रिकॉर्डिंग बहुत आसान हो चुकी है। आज के समय में किसी भी गीत की रिकॉर्डिंग करने के लिए गीत में प्रयोग होने वाले सभी गायकों और वादकों को एक साथ एक ही रिकॉर्डिंग स्टूडियो में एक साथ बैठकर रिकॉर्डिंग करने की आवश्यकता नहीं है। सभी गायकों और वादकों की अलग-अलग समय पर रिकॉर्डिंग संभव है।रिकॉर्डिंग तकनीक की प्रगति ने भारतीय सुगम संगीत को नई दिशा दी है। पहले जहां लाइव प्रस्तुतियां और पारंपरिक रिकॉर्डिंग मुख्य माध्यम थी वहीं अब डिजिटल रिकॉर्डिंग, ऑटो ट्यूनिंग, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे नवाचारों ने संगीत की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। रिकॉर्डिंग तकनीक ने जहां संगीत को संभाला,वहीं संगीत की गुणवत्ता को बरकरार रखने में और विभिन्न गायन शैलियों और विभिन्न विधाओं को नए युग में पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण रोल अदा किया है। आधुनिक रिकॉर्डिंग तकनीक जैसे ऑटो ट्यून ,वोकल प्रोसेसिंग और होम स्टूडियो सेटअप आदि कलाकारों को स्वतंत्र रूप से उच्च गुणवत्ता वाली रिकॉर्डिंग की सुविधा प्रदान करती है। इसके अलावा ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म ने संगीतकारों को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सुअवसर प्रदान किया है। डिजिटल युग के आगमन के साथ संगीतकार, निर्माता और रिकॉर्डिंग तकनीशियन ने पारंपरिक तरीके से हटकर नई तकनीक का उपयोग शुरू कर दिया है।
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Author: Mr ARPIT SHARMA
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Submitted on : 22-Feb-2025
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Arts : India/ Music/ Hindustani Classical Music |
Journal ID : 0030-101-0081
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